प्रस्तावना
भारत जैसे विकासशील देश में युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी मानी जाती है। यदि युवाओं को सही प्रशिक्षण और कौशल प्रदान किया जाए, तो वे न केवल रोजगार पा सकते हैं, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने नेशनल एप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण, औद्योगिक अनुभव और रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
नेशनल एप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम क्या है?
(What is National Apprenticeship Promotion Scheme?)
नेशनल एप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत 19 अगस्त 2016 को की गई थी। इस योजना के अंतर्गत उद्योगों और प्रतिष्ठानों को प्रशिक्षुओं (Apprentices) को प्रशिक्षण देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी दी जाती है। यह योजना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (DGT) के अंतर्गत संचालित की जाती है।
योजना का उद्देश्य
(Objectives of NAPS)
- युवाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करना।
- एप्रेंटिसशिप को रोजगारोन्मुख बनाना।
- उद्योगों को प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन देना।
- रोजगार योग्य मानव संसाधन तैयार करना।
- युवाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना।
- स्किल इंडिया मिशन को समर्थन देना।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
(Key Features of the Scheme)
- योजना के तहत प्रशिक्षुओं को स्टाइपेंड (वृत्ति) का 25% (अधिकतम ₹1,500 प्रति माह) सरकार द्वारा दिया जाता है।
- एप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण की मूलभूत प्रशिक्षण लागत (Basic Training Cost) का भी सरकार द्वारा 50% तक भुगतान किया जाता है।
- यह योजना राष्ट्रीय एप्रेंटिसशिप पोर्टल (www.apprenticeshipindia.gov.in) के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल है।
- प्रशिक्षु को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) के साथ क्लासरूम ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- योजना के अंतर्गत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के प्रतिष्ठान शामिल हो सकते हैं।
पात्रता मानदंड
(Eligibility Criteria)
प्रशिक्षुओं (Apprentices) के लिए:
- भारतीय नागरिक होना चाहिए।
- न्यूनतम उम्र 14 वर्ष होनी चाहिए।
- कम से कम 5वीं से 12वीं पास, ITI, डिप्लोमा या ग्रेजुएट होना चाहिए (पद के अनुसार)।
- पहली बार एप्रेंटिसशिप ले रहे हों।
प्रतिष्ठानों के लिए:
- वैध उद्योग या प्रतिष्ठान होना चाहिए।
- प्रशिक्षु संख्या कर्मचारियों की संख्या के 2.5% से 15% तक हो सकती है।
- बेसिक ट्रेनिंग सुविधा या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान के साथ करार होना चाहिए।
प्रशिक्षण की प्रक्रिया
(Apprenticeship Training Process)
- रजिस्ट्रेशन – प्रशिक्षु और प्रतिष्ठान दोनों को www.apprenticeshipindia.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करना होता है।
- मैचिंग और अनुबंध – प्रशिक्षु और नियोक्ता एक-दूसरे को चुनकर एप्रेंटिसशिप अनुबंध करते हैं।
- प्रशिक्षण अवधि – यह 6 महीने से 3 वर्ष तक हो सकती है (पद के अनुसार)।
- प्रमाण पत्र – प्रशिक्षण पूर्ण होने पर राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण पत्र दिया जाता है।
- रोजगार अवसर – कई मामलों में प्रशिक्षुओं को उसी कंपनी में स्थायी नौकरी मिल जाती है।
प्रशिक्षण के प्रकार
(Types of Apprenticeship Training)
1. Designated Trades (निर्धारित ट्रेड्स)
- DGT द्वारा अधिसूचित ट्रेड्स (जैसे इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर आदि)।
- अधिकतर ITI पास अभ्यर्थियों के लिए उपयुक्त।
2. Optional Trades (वैकल्पिक ट्रेड्स)
- प्रतिष्ठान द्वारा बनाए गए ट्रेड्स।
- कंपनी की आवश्यकता के अनुसार लचीली व्यवस्था।
योजना के लाभ
(Benefits of the Scheme)
प्रशिक्षुओं के लिए:
- कौशल विकास और औद्योगिक अनुभव।
- प्रशिक्षण के दौरान वृत्ति (Stipend) प्राप्त होता है।
- प्रशिक्षण के बाद रोजगार के बेहतर अवसर।
- राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से मान्यता प्राप्त कौशल।
प्रतिष्ठानों के लिए:
- कम लागत में कुशल श्रमिक तैयार करना।
- सरकार की ओर से वित्तीय सहायता।
- भविष्य के कर्मचारियों को तैयार करना।
- CSR और सामाजिक उत्तरदायित्व में योगदान।
योजना का डिजिटल पोर्टल
(Apprenticeship India Portal)
www.apprenticeshipindia.gov.in पर
- प्रशिक्षु और उद्योग दोनों रजिस्टर हो सकते हैं।
- अनुबंध, मॉनिटरिंग और स्टाइपेंड भुगतान की निगरानी की जा सकती है।
- प्रशिक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ होती है।
आँकड़े और उपलब्धियाँ
(Progress and Achievements)
- 2024 तक देशभर में 20 लाख से अधिक प्रशिक्षु रजिस्टर हो चुके हैं।
- हजारों प्रतिष्ठानों ने एप्रेंटिसशिप को अपनाया है।
- हर साल लाखों प्रशिक्षुओं को रोजगार मिल रहा है।
- योजना ने स्किल इंडिया अभियान को गति दी है।
योजना से जुड़ी चुनौतियाँ
(Challenges in Implementation)
- ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की जानकारी का अभाव।
- कई प्रतिष्ठान एप्रेंटिसशिप को बोझ मानते हैं।
- प्रशिक्षुओं को उचित मार्गदर्शन और करियर योजना नहीं मिलती।
- स्टाइपेंड की अनियमितता की शिकायतें।
समाधान और सुधार के सुझाव
(Solutions and Recommendations)
- प्रचार-प्रसार के माध्यम से योजना की जागरूकता बढ़ाई जाए।
- स्कूल और कॉलेज स्तर पर मार्गदर्शन शिविर आयोजित किए जाएँ।
- प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहन और मान्यता दी जाए।
- मॉनीटरिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए।
- प्रशिक्षुओं के लिए करियर काउंसलिंग और प्लेसमेंट सेवा उपलब्ध कराई जाए।
अन्य संबंधित योजनाएँ
(Related Government Schemes)
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- उद्योग आधारित प्रशिक्षण योजना
- डिजिटल इंडिया स्किल्स मिशन
- स्किल इंडिया अभियान
इन योजनाओं के साथ NAPS जुड़कर भारत को कुशल जनशक्ति युक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।
सफलता की कहानियाँ
(Success Stories)
- पुणे के अभिषेक शर्मा ने ITI के बाद एक ऑटोमोबाइल कंपनी में एप्रेंटिसशिप की और अब वह एक स्थायी कर्मचारी है।
- तमिलनाडु की संध्या ने इलेक्ट्रिकल ट्रेड में प्रशिक्षण लेकर एक MNC में नौकरी प्राप्त की।
- राजस्थान की एक ग्रामीण युवती, जिसने पहली बार मशीन चलाना सीखा और अब अपनी यूनिट चला रही है।
निष्कर्ष
(Conclusion)
नेशनल एप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम न केवल युवाओं को कौशलयुक्त बनाती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाती है। यह योजना औद्योगिक क्षेत्र और मानव संसाधन के बीच की कड़ी है। यदि इसे और बेहतर तरीके से लागू किया जाए, तो भारत के लाखों युवाओं को रोजगार, सम्मान और विकास के अवसर मिल सकते हैं।