क्लाउड आधारित डिजिलॉकर योजना (Cloud-Based DigiLocker Yojana)


प्रस्तावना

डिजिटल युग में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके दस्तावेज़ सुरक्षित, सुलभ और हमेशा उपलब्ध रहें। सरकारी योजनाओं, परीक्षाओं, स्कूल/कॉलेज में दाखिले या नौकरी के लिए आजकल हर जगह दस्तावेजों की ज़रूरत होती है। ऐसे में उन्हें बार-बार फिजिकल फॉर्म में ले जाना न केवल असुविधाजनक है बल्कि जोखिम भरा भी।

इसी समस्या का समाधान लेकर आई है भारत सरकार की क्लाउड आधारित डिजिलॉकर योजना। यह योजना डिजिटल इंडिया मिशन का हिस्सा है और इसका उद्देश्य नागरिकों को दस्तावेजों की डिजिटल स्टोरेज की सुविधा प्रदान करना है। यह सेवा सरल, सुरक्षित, और समय की बचत करने वाली है।


डिजिलॉकर क्या है?

(What is DigiLocker?)

डिजिलॉकर (DigiLocker) भारत सरकार द्वारा संचालित एक क्लाउड-आधारित डिजिटल लॉकर सेवा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संग्रह, साझा और सत्यापित करने की सुविधा देना है।

यह सेवा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के हिस्से के रूप में 2015 में शुरू की गई थी।


डिजिलॉकर योजना का उद्देश्य

(Objectives of the Scheme)

  • नागरिकों को दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण की सुविधा देना।
  • दस्तावेज़ों की ऑनलाइन प्रमाणिकता और वैधता सुनिश्चित करना।
  • पेपरलेस शासन (Paperless Governance) को बढ़ावा देना।
  • सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और गति लाना।
  • नागरिकों को डिजिटल सुविधा के माध्यम से सशक्त बनाना।

डिजिलॉकर की प्रमुख विशेषताएं

(Key Features of DigiLocker)

  • क्लाउड स्टोरेज: हर उपयोगकर्ता को 10MB से 1GB तक का फ्री स्टोरेज स्पेस
  • आधार-आधारित लॉगिन: लॉकर में लॉगिन करने के लिए आधार नंबर और OTP का उपयोग।
  • केंद्र व राज्य सरकार की एजेंसियों से लिंकिंग: जैसे CBSE, UIDAI, परिवहन विभाग, AICTE आदि से जुड़े दस्तावेज़।
  • ई-दस्तावेज़ साझा करने की सुविधा: संस्थानों को सीधे दस्तावेज भेज सकते हैं।
  • सत्यापन योग्य दस्तावेज़: QR कोड, डिजिटल हस्ताक्षर और UDI द्वारा प्रमाणन।
  • मॉबाइल ऐप के माध्यम से सुविधा।

डिजिलॉकर में स्टोर किए जा सकने वाले दस्तावेज़

(Types of Documents in DigiLocker)

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC)
  • 10वीं और 12वीं के मार्कशीट (CBSE, NIOS आदि से)
  • डिग्री/डिप्लोमा सर्टिफिकेट
  • मतदाता पहचान पत्र
  • आय/जाति/निवास प्रमाणपत्र
  • बीमा पॉलिसी दस्तावेज़
  • बैंक/राशन कार्ड विवरण
  • कोविड-19 प्रमाणपत्र (Vaccination Certificate)

डिजिलॉकर की कार्यप्रणाली

(How DigiLocker Works?)

चरण 1: पंजीकरण

  • www.digilocker.gov.in वेबसाइट या ऐप पर जाएं।
  • आधार नंबर दर्ज करें और OTP के ज़रिए लॉगिन करें।

चरण 2: दस्तावेज़ अपलोड करें या स्वचालित रूप से प्राप्त करें

  • आप स्वयं अपने स्कैन किए गए दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं।
  • या सरकार की संबंधित एजेंसियां आपके लॉकर में स्वचालित रूप से दस्तावेज़ भेज सकती हैं।

चरण 3: दस्तावेज़ साझा करना

  • किसी संस्था को ईमेल या लिंक के माध्यम से दस्तावेज़ भेजें।
  • QR कोड के माध्यम से दस्तावेज़ सत्यापित करें।

डिजिलॉकर के लाभ

(Benefits of Cloud-Based DigiLocker)

1. सुरक्षा और गोपनीयता

  • क्लाउड पर स्टोरेज, जो अत्याधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीक द्वारा सुरक्षित होता है।
  • OTP आधारित लॉगिन प्रणाली।

2. सुलभता

  • किसी भी समय, कहीं भी मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से दस्तावेज़ तक पहुंच।
  • फिजिकल दस्तावेज़ की आवश्यकता समाप्त

3. कानूनी मान्यता

  • डिजिलॉकर से डाउनलोड किए गए दस्तावेज़ आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 4 के तहत पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य होते हैं।

4. पर्यावरणीय लाभ

  • कागज की बचत और ग्रीन गवर्नेंस को बढ़ावा।

5. सरकारी सेवाओं में त्वरित प्रक्रिया

  • दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया आसान, शीघ्र और डिजिटल।

डिजिलॉकर से जुड़े सरकारी विभाग

(Departments and Institutions Linked to DigiLocker)

  • CBSE: अंक पत्र और प्रमाण पत्र
  • NIOS: प्रमाण पत्र
  • परिवहन विभाग: DL और RC
  • UIDAI: आधार कार्ड
  • EPFO: पेंशन स्टेटमेंट
  • IRCTC: टिकट बुकिंग पहचान
  • AICTE/UGC/NAAC: डिग्री और डिप्लोमा
  • स्वास्थ्य मंत्रालय: कोविड प्रमाणपत्र

डिजिलॉकर मोबाइल ऐप

(DigiLocker Mobile App)

  • Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध।
  • फिंगरप्रिंट और फेस आईडी लॉगिन सुविधा।
  • डार्क मोड, सर्च ऑप्शन, और ऑफलाइन मोड।
  • QR कोड स्कैनिंग द्वारा त्वरित सत्यापन।

क्लाउड स्टोरेज का महत्व

(Importance of Cloud in DigiLocker)

  • लागत में कमी: सर्वर, हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं।
  • ऑटोमेटिक बैकअप और डेटा रिकवरी
  • स्केलेबिलिटी: लाखों नागरिकों का डेटा आसानी से स्टोर।
  • डेटा सेंटर भारत में ही स्थित होने से गोपनीयता बनी रहती है।

डिजिलॉकर योजना की चुनौतियाँ

(Challenges in Implementation)

  • ग्रामीण इलाकों में डिजिटल साक्षरता की कमी
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या
  • कुछ एजेंसियों के दस्तावेज़ अभी भी डिजिलॉकर से जुड़े नहीं हैं।
  • फ्रॉड और फर्जी ऐप का खतरा।
  • उपयोगकर्ताओं में अभी भी प्रामाणिकता को लेकर संदेह

समाधान और सुझाव

(Suggestions and Improvements)

  • गांव-गांव डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना।
  • डिजिलॉकर ऐप को भाषाई विविधता के अनुसार बनाना।
  • और अधिक राज्य और निजी एजेंसियों को डिजिलॉकर से जोड़ना।
  • मल्टीफैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे एडवांस सुरक्षा उपाय शामिल करना।
  • स्कूलों, पंचायतों और CSC सेंटरों में डिजिलॉकर सहायता केंद्र बनाना।

प्रेरणादायक उदाहरण

(Success Stories)

  • UPSC और CBSE परीक्षाओं में अब डिजिलॉकर से मार्कशीट स्वीकार की जाती है।
  • ड्राइविंग लाइसेंस और RC को डिजिलॉकर के माध्यम से दिखाने पर पुलिस द्वारा मान्यता प्राप्त
  • कोविड-19 के समय लाखों लोगों ने डिजिलॉकर से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड किया।

भविष्य की संभावनाएँ

(Future of DigiLocker Scheme)

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा दस्तावेज़ की स्वत: श्रेणीकरण।
  • डिजिलॉकर को पासपोर्ट, वीज़ा और बायोमेट्रिक पहचान से जोड़ना।
  • प्राइवेट संस्थानों को भी डिजिलॉकर से जोड़कर भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाना।
  • डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल वसीयत और संपत्ति दस्तावेजों को सुरक्षित रखना।

निष्कर्ष

(Conclusion)

क्लाउड आधारित डिजिलॉकर योजना भारत के नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह योजना केवल दस्तावेजों को डिजिटल रूप में स्टोर करने की सुविधा ही नहीं देती, बल्कि देश को पेपरलेस, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत भी बनाती है।

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